भारत, जो एक कृषि प्रधान देश है, में आज भी 60% से अधिक जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। बावजूद इसके, किसानों की स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब होती जा रही है। आर्थिक असमानता, ऋण का बोझ, बदलते जलवायु के कारण फसल नुकसान, और सरकार की नीतियों में कमी ने किसानों की दुर्दशा को और बढ़ा दिया है। यह समस्या केवल एक वर्ग की नहीं, बल्कि पूरे देश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने की है।
किसानों की वर्तमान स्थिति
आज भारतीय किसान विभिन्न चुनौतियों का सामना कर रहा है। सबसे बड़ी समस्या उनकी आय में गिरावट है। औसत किसान की मासिक आय लगभग 10,000 रुपये है, जो उनकी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में भी अपर्याप्त है। इसके अलावा, फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का निर्धारण अक्सर किसानों की वास्तविक लागत को कवर नहीं करता।
कर्ज भी एक बड़ी समस्या है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (NSSO) के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 50% किसान परिवार कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। इनमें से अधिकांश कर्ज निजी साहूकारों से लिया जाता है, जिनका ब्याज दर बहुत अधिक होता है।
प्राकृतिक आपदाओं का प्रभाव
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव भी किसानों पर भारी पड़ा है। असमय बारिश, बाढ़, सूखा और तापमान में बदलाव ने फसलों की पैदावार को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे किसान न केवल आर्थिक संकट में फंसते हैं, बल्कि मानसिक तनाव का भी शिकार हो जाते हैं। किसानों द्वारा आत्महत्या की घटनाएं इन समस्याओं की भयावहता को और उजागर करती हैं।
सरकारी नीतियों की कमी
किसानों की समस्याओं का एक बड़ा कारण यह है कि कई सरकारी नीतियां जमीनी स्तर पर प्रभावी नहीं हो पातीं। कृषि के लिए बजट आवंटन सीमित है, और सब्सिडी का लाभ सही तरीके से किसानों तक नहीं पहुंचता। कई बार बड़ी योजनाएं कागजों में ही रह जाती हैं।
समाधान और आगे की राह
1. फसलों का उचित मूल्य: किसानों को उनकी फसलों का सही दाम मिले, इसके लिए सरकार को MSP में वृद्धि करनी चाहिए और इसे कानूनी रूप से लागू करना चाहिए।
2. कर्ज राहत और वित्तीय मदद: किसानों को सस्ते ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराया जाए। इसके अलावा, कर्ज माफी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए।
3. सिंचाई व्यवस्था में सुधार: सिंचाई सुविधाओं का विस्तार किया जाए ताकि किसान बारिश पर निर्भर न रहें।
4. जलवायु-अनुकूल खेती: जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किसानों को नई तकनीक और जानकारी प्रदान की जाए।
5. फसल बीमा योजना: बीमा योजनाओं को और प्रभावी बनाया जाए ताकि किसानों को प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान की भरपाई हो सके।
6. प्रत्यक्ष विपणन: किसानों को मंडी के बिचौलियों से बचाने के लिए ऑनलाइन मार्केटिंग और प्रत्यक्ष विपणन की व्यवस्था की जाए।
निष्कर्ष
कृषि भारत की रीढ़ है, लेकिन अगर किसान ही खुशहाल नहीं होगा, तो देश प्रगति कैसे करेगा? किसानों की समस्याओं का समाधान केवल नीतियों में नहीं, बल्कि उनके वास्तविक कार्यान्वयन में है। किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है। कृषि और किसानों की दुर्दशा को दूर करने के लिए सरकार, समाज और निजी क्षेत्र को मिलकर कार्य करना होगा। तभी हमारा “अन्नदाता” वास्तव में सुखी और समृद्ध हो सकेगा।
लेखक:
विश्राम सिंह यादव
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